मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

मरकुस - दिन 24

कैसे पढ़ें? निर्देशों के लिए यहाँ क्लिक करें।

पड़ने का भागमरकुस 11 : 20 - 33 

समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. प्रार्थना करने से पहले मुझे क्या करना चाहिए ?
2. याजकों और धर्मशास्त्रियों किन से ज्यादा डरते थे - परमेश्वर से या लोगों से ? या दूसरे शब्दों में वे किनको खुश रखने का प्रयास ज्यादा करते थे ? क्या मैं भी उनके समान हूँ इस विषय में ?

और गहरी सोच  के लिए:
1. याजकों और धर्मशास्त्रियों ने यीशु का अधिकार को नहीं माना। क्या मैं यीशु के अधिकार को मानता हूँ मेरे जीवन को साफ करने के लिए ? क्या मैं यीशु को पूरा इजाज़त दिया हूँ की वह मेरे जीवन को कैसे भी तरह से सुधरे ?

सोमवार, 20 अप्रैल 2020

मरकुस - दिन 23

कैसे पढ़ें? निर्देशों के लिए यहाँ क्लिक करें।

पड़ने का भागमरकुस 11 : 12 - 19 

कठिन शब्दों :
1. मन्दिर में : यह मंदिर का बहरी आंगन था। अगर गैर यहूदियों परमेश्वर कि आराधना करना चाहते थे, तो वे लोग यहाँ पर परमेश्वर कि आराधना करने आ सकते थे। परन्तु उन समयों में यहूदियों गैर यहूदियों को मंदिर आने से मन करते हुए, वहां पर अपना धंधा चलने लगे। जो भी लोग आराधना के लिए आते थे उन्हें कई बार कुछ जानवर या चिड़िया लेन कि जरुरत थी बलि के लिए। इसलिए बलि के लिए जानवरों और चिड़ियों को बेचने का धंधा चल रहा था। 

समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. अंजीर का पेड़ में सिर्फ फल होने की ऋतू में ही पत्ते निकल आते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाये तो अगर पत्ते दिखे तो उसका मतलब है कि फल भी होना चाहिए। क्या मेरे जीवन में भी फल का दिखावा है मगर फल नहीं ? (मतलब मैं कई चीज़ें करता हूँ जो लोग को दिखे कि मैं परमेश्वर से प्रेम करता हूँ लेकिन मेरे मन में बुरी चीज़ें हैं)?
2. जहाँ पर आराधना हो रहा था वहां पर लोग अपने ही भलाई के लिए धंधा चला रहे थे। क्या मेरे जीवन में भी जहाँ आराधना होना चाहिए वो नहीं हो रहा है मगर अपना ही बढ़ाई हो रहा है ?
3.  जब यीशु मेरे गलितयों को सुधारता है , तो क्या मैं याजकों के समान उस पर गुस्सा करता हूँ या क्या मैं अपना गलती स्वीकार करके अपने आप को सुधरने का प्रयास करता हूँ ?

और गहरी सोच  के लिए:
1. मंदिर में रोज़ बलि चढ़ाई जा रही थी मगर किसा का भी मन प्रभु कि ओर नहीं था , वैसे ही जैसे अंजीर के पेड़ में पत्ते थे मगर फल नहीं। हो सकता मेरे जीवन में भी प्रार्थना हो और कई धार्मिक चीज़ें हो, पर हो सकता है की प्रभु मेरे जीवन में न हो। 

रविवार, 19 अप्रैल 2020

मरकुस - दिन 22

कैसे पढ़ें? निर्देशों के लिए यहाँ क्लिक करें।

पड़ने का भागमरकुस 10: 45 - 11 : 11 

कठिन शब्दों :
1. दाऊद का पुत्र : पुराने नियम में भविष्यवाणी हुई थी कि जो मसीह आएगा वो दाऊद के वंश का होगा। तो इसलिए उसको दाऊद का पुत्र से भी जाना जाता था। यहां पर वह भिकारी जब यीशु को दाऊद का पुत्र के नाम से पुकारता है तो वह यह बात को स्वीकार करता है और विश्वास करता है कि यीशु ही वो मसीह है जिसके बारे में भविष्याणि दी गई थी। 

2. गधी के बछेरे : जकर्याह 9:9 में भविष्यवाणी दी गयी थी कि मसीह एक गाढ़ी के बछेरे में सवारी करते हुए आएगा। यह भी परमेश्वर के वचन का पूरा होने को दर्शाता है। 

3. होशन्ना : इस शब्द का अर्थ है, प्रभु हमें बचा या प्रभु हमारी सहायता कर।

समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. जा आस पास के लोग उस बर्तीमाई को डांटा और चुप कराने का कोशिश किया तो फिर भी वह और जोर से प्रभु कि ओर पुकारता रहा। क्या मैं भी इसके समान औरों की नहीं डरते हुए परमेश्वर से प्रार्थना और विनती करता हूँ ?
2. यीशु के अनुसार उस बर्तीमाई का उद्धार किस सिद्धांत के आधार पे हुआ ? मेरा उद्धार कैसे हो सकता है ? क्या मेरे खुद के अच्छे कामों या मेहनत से या विश्वास से ?
3.  यरूशलेम के लोग यीशु का स्वागत किये। क्या मैं यीशु का मेरे दिल में स्वागत करने को तैयार हूँ ?

और गहरी सोच  के लिए:
1. यीशु का यरूशलेम प्रवेश करना हज़ारों साल पहले दी गयी भविष्याणि के अनुसार हुआ। अगर परमेश्वर का वचन सच होता है, तो क्या मैं उसे उतना ही निश्चयता के साथ पढता हूँ और क्या मेरा उस पर पक्का भरोसा और विश्वास है ?

शनिवार, 18 अप्रैल 2020

मरकुस - दिन 21

कैसे पढ़ें? निर्देशों के लिए यहाँ क्लिक करें।

पड़ने का भागमरकुस 10: 32 - 45 

समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. यीशु का इस संसार में आने का उद्देश्य दिया हुआ है इस भाग में। वह उद्देश्य क्या था ?
2. उस उद्देश्य को मन में रखते हुए देखिये यीशु के साथ क्या होने वाला था जो उन्होंने शिष्यों को समझाया। इस बात को जानते हुए क्या मुझे यीशु के प्रति प्रेम जागृत होता है ?
3. यीशु चेलों से कहते हैं कि उन्हें इस संसार के समान नहीं रहना चाहिए। किस विषय में इस बात को कहते हैं ? यीशु के चेलों को कैसा होना चाहिए ?

और गहरी सोच  के लिए:
1. यीशु के अनुसार किसी कि सेवा करने का अर्थ क्या था ? सेवा करने के लिए यीशु ने औरों के लिए क्या किया ? अगर मुझे लोगों की सेवा करना है तो मुझे क्या करना होगा ?

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2020

मरकुस - दिन 20

कैसे पढ़ें? निर्देशों के लिए यहाँ क्लिक करें।

पड़ने का भागमरकुस 10: 17 - 31 

समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. एक धनवान व्यक्ति का भरोसा किस पर रहता है ? क्या खुद के धन पे या परमेश्वर पे ? इन सवालों के सन्दर्भ में विचार कीजिये यीशु ने क्यों कहा होगा की एक धनवान व्यक्ति को परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना बहुत कठिन है ?
2. क्या मैं उस धनवान व्यक्ति के समान अपने आप को अच्छा समझता हूँ ?
3. इस भाग से परमेश्वर के राज्य का प्रवेश करने के विषय में आप क्या समझते हैं ? क्या खुद के मेहनत से परमेश्वर के राज्य को प्रवेश किया जा सकता है जैसे उस धनवान व्यक्ति ने प्रयास किया ? यह बात किसके द्वारा संभव है ?
4. क्या मुझे यीशु के पीछे होने के लिए कुछ खोना पढ़ रहा है, हो सकता है धन या परिवार के साथ अच्छा रिश्ता (क्योंकि वे विरोध करते हैं) या दोस्तों की दोस्ती (क्योंकि मैं अब उनके साथ बुरी चीज़ें नहीं करना चाहता) ? यीशु ने मेरे लिए 30वि आयत में क्या वायदा दिया ?

और गहरी सोच  के लिए:
1. ३०वी आयत में यीशु वायदा देते हैं कि जो कोई यीशु के लिए कुछ त्यागता है उसके लिए बहुत अच्छी चीज़ें मिलेंगी। परन्तु वे सब यातना के साथ मिलेंगी। क्या मैं इन यातनाओं को सहने को तैयार हूँ ?
2. यह परिवार जो यीशु कहते हैं हमें मिलेगा अगर हमें यीशु के लिए परिवार त्यागना है , वो परिवार कहाँ मिलेगा ? क्या हो सकता है कि यीशु चर्च (कलीसिया) कि बात कर रहे हैं ? क्या मैं संगति में जाता हूँ ?

गुरुवार, 16 अप्रैल 2020

मरकुस - दिन 19

कैसे पढ़ें? निर्देशों के लिए यहाँ क्लिक करें।

पड़ने का भागमरकुस 10: 1-16 

समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. क्या मैं भी फरीसियों के समान अक्सर पूछता हूँ - क्या मैं ये कर सकता हूँ या क्या मैं वो कर सकता हूँ ? बल्कि मुझे पूछना चाहिए कि परमेश्वर मेरे जीवन से क्या चाहता है ? परमेश्वर कि इच्छा जानने का प्रयास करें न कि मेरा अधिकार। किन किन विषयों पर मैं ऐसा सोचता हूँ ?
2. परमेश्वर के अनुसार ब्याह का उद्देश्य क्या था ? क्या तलाक करना उचित है ?
3. बच्चों का विश्वास किस प्रकार होता है ? उनके और बड़ों के विश्वास में क्या अंतर है ? क्या मैं भी बच्चों के समान साफ मन से विश्वास करता हूँ ?
4. जब छोटे से छोटे बच्चों को यीशु अपने पास बुलाये और आशीषित किये, तब क्या मुझे यीशु के पास जाने में संकोचना सही है ?

और गहरी सोच  के लिए:
1. आज कि दुनिया में लोग के कई प्रकार के विचार हैं ब्याह के विषय में। पुरुष और पुरुष या स्त्री और स्त्री एक दूसरे  से ब्याह करते हैं। यीशु का इस विषय में क्या शिक्षा था ?

बुधवार, 15 अप्रैल 2020

मरकुस - दिन 18

कैसे पढ़ें? निर्देशों के लिए यहाँ क्लिक करें।

पड़ने का भागमरकुस 9 : 30 - 50 

कठिन शब्दों :
1. नमक : इस्राएल में जो नमक का उपयोग होता था वो मृत सागर से आता था और उसमे कई अशुद्धताएं थीं। इसकी वजह से कई बार उसकी नामकीनपन चली जाती थी।

समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. यीशु चेलों को अकेला सिखाते हैं। क्या मुझे यह जानकर प्रोत्साहन मिलती है कि यीशु जितना कि भीड़ क्यों न हो अपने चेलों के लिए उनके पास अलग सा समय है ?
2. रास्ते में चेलों के सोच विचार से उनके बारे में क्या पता चलता है ? क्या वही स्वार्थी स्वभाव के कारण वे ३८वे वचन में उस व्यक्ति को रोखने का प्रयास किये ?
3. यीशु के अनुसार हम में कैसा स्वभाव होना चाहिए ? क्या मैं औरों का सेवक बनने को तैयार हूँ ?
4. पाप के विषय में यीशु कितने गंभीरता के साथ शिक्षा दिए ? क्या मैं पाप को उतना ही गंभीर लेता हूँ ? क्या पाप को हटाने के लिए मैं अपने जीवन से कुछ भी हटाने को तैयार हूँ ? हाथ पैर शायद काटना नहीं पड़े पर अगर मैं अपने फोन के कारण पाप कर रहा हूँ क्या मैं अपना फोन के बिना रह सकता हूँ ?
5. मुझे अपने जीवन से पाप हटाने के लिए क्या हटाना होगा ?

और गहरी सोच  के लिए:
1. परमेश्वर कि सेवा में हर किसी का योगदान जरुरी है। भले वो आदमी छोटा से छोटा काम क्यों न कर रहा हो। यीशु कहते हैं अगर हम प्रभु के लोगों को पानी भी पिलाये वो बड़ी बात है। परमेश्वर के सेवा में मेरा क्या योगदान है ?

मरकुस - दिन 28

कैसे पढ़ें? निर्देशों के लिए यहाँ क्लिक करें। पड़ने का भाग :  मरकुस 13 : 1 - 13   कठिन शब्दों : 1.  ढहा दिया जायेगा  : 40 सालों के बाद ईस...