शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

मरकुस - दिन 27

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पड़ने का भागमरकुस 12 : 35 - 44 

कठिन शब्दों :
1. दाऊद : वह इस्राएल का सबसे महान राजा था। पुराने नियम में उसके बारे में लिखी गयी है। भविष्यवाणी दी गयी थी पुराने नियम में कि मसीह दाऊद के वंश में पैदा होगा। और वैसा ही हुआ। परन्तु यीशु कह रहे हैं कि हलाकि यीशु शारीरिक रूप में दाऊद से जन्मा , मगर वह दाऊद का भी प्रभु है , या दूसरे शब्दों में वह दाऊद से भी पहले जीवित था , या वह अनंत है। इसका मतलब यही हो सकता है कि यीशु स्वयं परमेश्वर है। 

समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. धर्मशास्त्रियों का गुनाह क्या था यीशु के अनुसार ? क्या मुझमे भी वही पाप यीशु को दिखेगा ? क्या मैं भी धर्मशास्त्रियों के समान दिखावे के लिए धार्मिक चीज़ों को करता हूँ ?
2. यीशु ने क्यों कहा कि उस विद्वि औरत ने बहुत ज्यादा दिया ?
3. इन दो कहानियों से हमें क्या पता चलता है ? क्या यीशु बाहरी बर्ताव को देखता है या अपने हृदय को ? क्या वह हमारे कार्यों के देखता है या इरादों को ?

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