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पड़ने का भाग: मरकुस 8 : 14 - 26
कठिन शब्दों :
1. हेरोदेस : हेरोदेस वहां का राजा था।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. क्या उस अंधे की ऑंखें एक ही बार में पूरी रीती से खुल गयीं ? क्या एक ही बार में मेरे प्रार्थनाओं का जवाब हमेशा मिलेगा ?
2. २१वि वचन में यीशु किस चीज़ को समझने कि बात कर रहे हैं ? अगर चेलों को याद रहता यीशु ने कितनों को कितना कम रोटी से खिलाया तो क्या वे रोटी या खाने को लेकर चिंता करते ?
3. यीशु चेलों से पूछते हैं अगर उनको याद है यीशु ने क्या किया। क्या यीशु के भलाई जो मेरे जीवन में हुआ है क्या मैं उसे याद रखता हूँ ?
और गहरी सोच के लिए:
1. जैसे उस अंधे कि ऑंखें धीरे धीरे खुली वैसे ही मेरी आत्मिक ऑंखें भी धीरे धीरे खुल सकते हैं। चेलों को यीशु के बारे में समझने में समय हुआ। तो क्या मुझे निराश होना है अगर विश्वास में पूरी तरह से तुरंत बढ़ न जाऊं ?
पड़ने का भाग: मरकुस 8 : 14 - 26
कठिन शब्दों :
1. हेरोदेस : हेरोदेस वहां का राजा था।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. क्या उस अंधे की ऑंखें एक ही बार में पूरी रीती से खुल गयीं ? क्या एक ही बार में मेरे प्रार्थनाओं का जवाब हमेशा मिलेगा ?
2. २१वि वचन में यीशु किस चीज़ को समझने कि बात कर रहे हैं ? अगर चेलों को याद रहता यीशु ने कितनों को कितना कम रोटी से खिलाया तो क्या वे रोटी या खाने को लेकर चिंता करते ?
3. यीशु चेलों से पूछते हैं अगर उनको याद है यीशु ने क्या किया। क्या यीशु के भलाई जो मेरे जीवन में हुआ है क्या मैं उसे याद रखता हूँ ?
और गहरी सोच के लिए:
1. जैसे उस अंधे कि ऑंखें धीरे धीरे खुली वैसे ही मेरी आत्मिक ऑंखें भी धीरे धीरे खुल सकते हैं। चेलों को यीशु के बारे में समझने में समय हुआ। तो क्या मुझे निराश होना है अगर विश्वास में पूरी तरह से तुरंत बढ़ न जाऊं ?
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