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पड़ने का भाग: मरकुस 6: 32 - 56
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. इन दो घटनाओं से यीशु के बारे में क्या पता चलता है ? क्या कोई साधारण मनुष्य ये सब कर सकता है ? तो फिर यीशु कौन है ?
2. लोग बहुत मुश्किल होने के बावजूद बहुत दूर चल कर गए ताकि वे यीशु से सिख सके। क्या मैं यीशु से सिखने के लिए उतना ही उत्सुक हूँ ?
3. दिन भर सीखाने के बाद यीशु बहुत थक गए हुए होंगे। पर फिर भी वे अकेले प्रार्थना करने को गए। क्या मैं भी प्रार्थना करने के लिए समय निकलता हूँ ?
4. जब शिष्यों ने यीशु को जितना उनके पास था उतना दिया , तब यीशु ने उसके द्वारा बहुतों को आशीषित किया। शायद मुझे लगता है कि मेरे पास तो उतना कुछ है नहीं और मैं सोचता हूँ इससे क्या होने वाला है , पर क्या मैं उसे यीशु को देने को तैयार हूँ ? वह उसके द्वारा लोगों को आशीषित करेगा।
और गहरी सोच के लिए:
1. ५२वे वचन में लिखा है कि चेले समझ नहीं पाए थे। क्या मैं भी वैसे कभी हो जाता हूँ कि यीशु के चमत्कार को देखने के बावजूद उसको शक करने लगता हूँ कभी कभी ?
पड़ने का भाग: मरकुस 6: 32 - 56
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. इन दो घटनाओं से यीशु के बारे में क्या पता चलता है ? क्या कोई साधारण मनुष्य ये सब कर सकता है ? तो फिर यीशु कौन है ?
2. लोग बहुत मुश्किल होने के बावजूद बहुत दूर चल कर गए ताकि वे यीशु से सिख सके। क्या मैं यीशु से सिखने के लिए उतना ही उत्सुक हूँ ?
3. दिन भर सीखाने के बाद यीशु बहुत थक गए हुए होंगे। पर फिर भी वे अकेले प्रार्थना करने को गए। क्या मैं भी प्रार्थना करने के लिए समय निकलता हूँ ?
4. जब शिष्यों ने यीशु को जितना उनके पास था उतना दिया , तब यीशु ने उसके द्वारा बहुतों को आशीषित किया। शायद मुझे लगता है कि मेरे पास तो उतना कुछ है नहीं और मैं सोचता हूँ इससे क्या होने वाला है , पर क्या मैं उसे यीशु को देने को तैयार हूँ ? वह उसके द्वारा लोगों को आशीषित करेगा।
और गहरी सोच के लिए:
1. ५२वे वचन में लिखा है कि चेले समझ नहीं पाए थे। क्या मैं भी वैसे कभी हो जाता हूँ कि यीशु के चमत्कार को देखने के बावजूद उसको शक करने लगता हूँ कभी कभी ?
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