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पड़ने का भाग: मरकुस 7 : 24 - 37
कठिन शब्दों :
1. यूनानी : यहूदी लोग यूनानी को नीच समझते थे। उनके अनुसार जो भी व्यक्ति यहूदी नहीं था, वह प्रभु के आशीष के हक़दार नहीं था। वे उन्हें कुत्ते की तरह समझते थे। पर वे गलत थे। उस स्त्री कि बेटी को ठीक करते हुए यीशु यहाँ दिखा रहे हैं कि यहूदी हो या यूनानी यीशु सब के लिए है।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. उस स्त्री को लगा कि गिरे हुए चुरचार समान थोड़ा सा आशीष भी काफी था उसकी बेटी के ठीक होने के लिए। क्या मुझमे इतना विश्वास है ?
2. उसे कुत्ते से तुलना जब किया गया, तब उस स्त्री ने कुछ नहीं किया परन्तु स्वीकार कर लिया। क्या मैं उतना नम्र हूँ कि यीशु के सामने झुक के जाऊं ?
और गहरी सोच के लिए:
1. क्या मैं यीशु के कार्यों को देख कर आश्चर्य से भर जाता हूँ और क्या मैं उसकी आराधना करते रहता हूँ ?
पड़ने का भाग: मरकुस 7 : 24 - 37
कठिन शब्दों :
1. यूनानी : यहूदी लोग यूनानी को नीच समझते थे। उनके अनुसार जो भी व्यक्ति यहूदी नहीं था, वह प्रभु के आशीष के हक़दार नहीं था। वे उन्हें कुत्ते की तरह समझते थे। पर वे गलत थे। उस स्त्री कि बेटी को ठीक करते हुए यीशु यहाँ दिखा रहे हैं कि यहूदी हो या यूनानी यीशु सब के लिए है।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. उस स्त्री को लगा कि गिरे हुए चुरचार समान थोड़ा सा आशीष भी काफी था उसकी बेटी के ठीक होने के लिए। क्या मुझमे इतना विश्वास है ?
2. उसे कुत्ते से तुलना जब किया गया, तब उस स्त्री ने कुछ नहीं किया परन्तु स्वीकार कर लिया। क्या मैं उतना नम्र हूँ कि यीशु के सामने झुक के जाऊं ?
और गहरी सोच के लिए:
1. क्या मैं यीशु के कार्यों को देख कर आश्चर्य से भर जाता हूँ और क्या मैं उसकी आराधना करते रहता हूँ ?
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