बुधवार, 8 अप्रैल 2020

मरकुस - दिन 12

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पड़ने का भागमरकुस 7 : 1 - 23 

कठिन शब्दों :
1. पुरखों की रीति / परंपरा : बाबुल कि निर्वासन के बाद , यहूदी धर्मशास्त्रियाँ लोगों के लिए बहुत सरे नियम बनाये। परमेश्वर के नियमों को रोज़ के व्यावहारिक जीवन में कैसे लागु किया जाये - इस बात को समझने के लिए उन्होंने अपने समझ से कई परम्पराएं और रीती रिवाज बनाये। ये नियमों को शुरुआत में लाये जाने के इरादे गलत नहीं थे। परन्तु ये परमेश्वर का वचन नहीं था और कहीं कहीं फरीसी लोग इन परम्पराओं को परमेश्वर के वचन से और अधिक मुख्यता देने लगे। वो बात गलत था।

समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. आपके अनुसार क्या कुछ भी खाने से लोग अशुद्ध हो सकते हैं ? यीशु के अनुसार लोग अशुद्ध किस चीज़ से होते हैं ?
2. क्या हमारे जीवन में हम कभी कभी रीती रिवाज़ों को ज्यादा ध्यान देते हुए प्रभु को भूल जाते हैं ? हमें परमेश्वर का वचन को पढ़ते हुए सही रीती से समझ कर ही कुछ भी चीज़ करना है।

और गहरी सोच  के लिए:
1. पुराने धर्मशास्त्रियों जिन्होंने पहले इन नियमों को बनाया उनका इरादा सही था। मगर वे परमेश्वर के ववचन को सच्ची रीती से नहीं समझ पाए। तो परमेश्वर का वचन को सावधानी के साथ समझने का प्रयास करना है और लोगों से भी जांचना है की हमारी समझ सही है या नहीं। 

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