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पड़ने का भाग: मरकुस 10: 45 - 11 : 11
कठिन शब्दों :
1. दाऊद का पुत्र : पुराने नियम में भविष्यवाणी हुई थी कि जो मसीह आएगा वो दाऊद के वंश का होगा। तो इसलिए उसको दाऊद का पुत्र से भी जाना जाता था। यहां पर वह भिकारी जब यीशु को दाऊद का पुत्र के नाम से पुकारता है तो वह यह बात को स्वीकार करता है और विश्वास करता है कि यीशु ही वो मसीह है जिसके बारे में भविष्याणि दी गई थी।
2. गधी के बछेरे : जकर्याह 9:9 में भविष्यवाणी दी गयी थी कि मसीह एक गाढ़ी के बछेरे में सवारी करते हुए आएगा। यह भी परमेश्वर के वचन का पूरा होने को दर्शाता है।
3. होशन्ना : इस शब्द का अर्थ है, प्रभु हमें बचा या प्रभु हमारी सहायता कर।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. जा आस पास के लोग उस बर्तीमाई को डांटा और चुप कराने का कोशिश किया तो फिर भी वह और जोर से प्रभु कि ओर पुकारता रहा। क्या मैं भी इसके समान औरों की नहीं डरते हुए परमेश्वर से प्रार्थना और विनती करता हूँ ?
2. यीशु के अनुसार उस बर्तीमाई का उद्धार किस सिद्धांत के आधार पे हुआ ? मेरा उद्धार कैसे हो सकता है ? क्या मेरे खुद के अच्छे कामों या मेहनत से या विश्वास से ?
3. यरूशलेम के लोग यीशु का स्वागत किये। क्या मैं यीशु का मेरे दिल में स्वागत करने को तैयार हूँ ?
और गहरी सोच के लिए:
1. यीशु का यरूशलेम प्रवेश करना हज़ारों साल पहले दी गयी भविष्याणि के अनुसार हुआ। अगर परमेश्वर का वचन सच होता है, तो क्या मैं उसे उतना ही निश्चयता के साथ पढता हूँ और क्या मेरा उस पर पक्का भरोसा और विश्वास है ?
पड़ने का भाग: मरकुस 10: 45 - 11 : 11
कठिन शब्दों :
1. दाऊद का पुत्र : पुराने नियम में भविष्यवाणी हुई थी कि जो मसीह आएगा वो दाऊद के वंश का होगा। तो इसलिए उसको दाऊद का पुत्र से भी जाना जाता था। यहां पर वह भिकारी जब यीशु को दाऊद का पुत्र के नाम से पुकारता है तो वह यह बात को स्वीकार करता है और विश्वास करता है कि यीशु ही वो मसीह है जिसके बारे में भविष्याणि दी गई थी।
2. गधी के बछेरे : जकर्याह 9:9 में भविष्यवाणी दी गयी थी कि मसीह एक गाढ़ी के बछेरे में सवारी करते हुए आएगा। यह भी परमेश्वर के वचन का पूरा होने को दर्शाता है।
3. होशन्ना : इस शब्द का अर्थ है, प्रभु हमें बचा या प्रभु हमारी सहायता कर।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. जा आस पास के लोग उस बर्तीमाई को डांटा और चुप कराने का कोशिश किया तो फिर भी वह और जोर से प्रभु कि ओर पुकारता रहा। क्या मैं भी इसके समान औरों की नहीं डरते हुए परमेश्वर से प्रार्थना और विनती करता हूँ ?
2. यीशु के अनुसार उस बर्तीमाई का उद्धार किस सिद्धांत के आधार पे हुआ ? मेरा उद्धार कैसे हो सकता है ? क्या मेरे खुद के अच्छे कामों या मेहनत से या विश्वास से ?
3. यरूशलेम के लोग यीशु का स्वागत किये। क्या मैं यीशु का मेरे दिल में स्वागत करने को तैयार हूँ ?
और गहरी सोच के लिए:
1. यीशु का यरूशलेम प्रवेश करना हज़ारों साल पहले दी गयी भविष्याणि के अनुसार हुआ। अगर परमेश्वर का वचन सच होता है, तो क्या मैं उसे उतना ही निश्चयता के साथ पढता हूँ और क्या मेरा उस पर पक्का भरोसा और विश्वास है ?
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