शुक्रवार, 27 मार्च 2020

उद्देश्य एवं दिशा निर्देशों

Hi दोस्तों। 

उम्मीद है कि आप सब स्वस्थ और तंदरुस्त हैं। यह ब्लॉग लिखने का मेरा यह उद्देश्य है कि हम सब मिलकर परमेश्वर के वचन, जो कि बाईबल में लिखा हुआ है उसको पढ़ें और समझें।

बाइबिल वास्तव में एक किताब नहीं बल्कि 66 किताबों का संग्रह है। इन 66 किताबों को एक साथ नहीं परंतु एक एक करके अगर हम पढ़ें तो और अच्छे से समझ सकते हैं। हम पहले मरकुस रचित सुसमाचार को पढ़ेंगे, जो कि नए नियम में दूसरी पुस्तक है। उसके समाप्त होने पर अगले किताब कि ओर जायेंगे और वैसे एक एक कर के पुरे बाइबिल को पढ़ने कि प्रयास करेंगे। 

पढ़ने के कुछ दिशा निर्देश:
1. आपको रोज़ पढ़ने का एक भाग मिलेगा। और समझने और विचार के लिए कुछ सवाल भी मैं आपको दूंगा। 
2. इसे आप अकेले में पढ़ सकते हो या औरों के साथ भी चर्चा करते हुए पढ़ सकते हो। 
3. यदि आप अकेले पढ़ रहे हो तो दो तीन बार पहले भाग को पढ़ लें और फिर सवालों के जवाब को ढूंढें या उन सवालों पर विचार करें। 
4. यदि आप औरों के साथ पढ़ रहे हो तो जोर से पुरे भाग को पहले पढ़ लें। और फिर एक व्यक्ति पहला सवाल पूछेगा और उस सवाल पर सभी चर्चा करेंगे। फिर दूसरा सवाल पूछेगा।  इस प्रकार चर्चा को आगे बढ़ाएं। 
5. सवाल के जवाब को दिए हुए भाग में पहले ढूंढें।  
6. यदि आपको बाइबिल पढ़ने का ज्यादा अनुभव नहीं है या आप के पास ज़्यादा समय नहीं है तो आप गहरी सोच की सवालों को छोड़ दें। 
7. भाग में से कुछ कठिन शब्दों का अर्थ तथा अन्य जानकारी दी जाएगी।  पूरी समझ के लिए उसे भी पढ़ें। 
8. एक भी दिन बिना छूटे रोज़ अगर आप पढ़ेंगे तो इसका ज्यादा आनंद उठा पाओगे। 

उम्मीद है कि आप परमेश्वर कि वचन को पढ़ते हुए उन्नति प्राप्त करोगे। मेरी प्रार्थना है की इस ब्लॉग के माध्यम से आप प्रभु को और जानोगे और उस प्रकार आशीष पाओगे। 

मेरी हिंदी बहुत कमज़ोर है। Google भैया के सहयोग से थोड़ा बहुत कोशिश कर रहा हूँ।  इसलिए गलतियों के लिए माफी मांगता हूँ।  और निवेदन है कि गलतियों को बताएं ताकि मैं आगे जाते हुए खुद को सुधर सकूँ। पढ़ने के लिए धन्यवाद। 

आपकी सेवा में,
यीशु का दास,
केलब 

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