शुक्रवार, 27 मार्च 2020

मरकुस - भूमिका एवं दिन 1

भूमिका

कलीसिया के इतिहास के अनुसार यह पुस्तक मरकुस कहलाने वाले यूहन्ना के द्वारा लिखी गई थी। वह पौलुस और बरनबास के सेवा के यात्राओं में उनका साथ दिया। (प्रेरितों के  काम 12: 23) वह पतरस का भी एक मुख्य सहकर्मी था। (1 पतरस 5: 13) कलीसिया के इतिहास से हमें यह भी मालूम पड़ता है कि इस किताब में लिखी हुई घटनाओँ कि जानकारी मरकुस को पतरस से ही मिला।

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पड़ने का भागमरकुस 1:1-15

कठिन शब्दों :
1. मन फिराव / पश्चाताप: यहूदी परमपरा के अनुसार लोग पश्चाताप या मन फिराव करते वक्त अपने पापों को अंगीकार करते थे, अपने पापों के प्रति दुखित होते थे और पाप को त्याग कर परमेश्वर के ओर लौटने का निर्णय लेते थे।

2. बपतिस्मा का अर्थ डूबना या डुबाना है। यह एक तस्वीर के रूप में पश्चाताप को दर्शाता है, जहाँ कि एक व्यक्ति जब पानी के अंदर जाता है तो अपने पुराने पाप भरी जीवन को लेते जाता है और जब ऊपर आता है तो फिरा हुआ मन के साथ उठता है।

समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. यह समाचार / सन्देश किसके बारे में है?
2. यहूदिया प्रदेश के सारे लोग क्या करते हुए यहुन्ना से बपतिस्मा लिए?
3. यीशु का समाचार के दो भाग हैं - सन्देश और वांछित प्रतिक्रिया। दोनों को ढूंढिए।
4. यीशु के शब्दों और लोगों कि कार्यों को मन में रखते हुए सोचिये कि मेरी क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए?

और गहरी सोच के लिए:
1. यीशु के बारे में दो लोग गवाही देते हैं। वे कौन है और वे यीशु के बारे में क्या कहते हैं?
2. यीशु के अकेलेपन का अनुभव कितने दिन के लिए थे? यीशु के इस अनुभव के बारे में जानते हुए आपको कैसा लगता है? क्या आप अकेलापन कभी महसूस करते हैं?
3. यहुन्ना यीशु के सामने अपने आप को कैसा समझता है? और मैं यीशु के सामने अपने आप को कैसा समझता हूँ?

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