सोमवार, 30 मार्च 2020

मरकुस - दिन 4

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पड़ने का भागमरकुस 2:14 - 3:6 

कठिन शब्दों :
1. सब्त / शब्बत : यहुदिओं के लिए शनिवार का दिन एक पवित्र दिन था। परमेश्वर कि आराधना किया जाता है सब्त के दिन। फरीसियों के अनुसार इस नियम के खातिर लोगों को कुछ भी काम नहीं करना चाहिए। सब्त के दिन को स्थापित करने में परमेश्वर का उद्देश्य था कि लोगों को आराम मिले, वे परमेश्वर कि आराधना करने को समय निकाले और ये याद करें कि परमेश्वर कि भलाई ही से वे अपना जीवन जीते हैं। कुल मिलाकर हम समझतें हैं कि मनुष्य कि भलाई के लिए सब्त को बनाया गया था। इस बात को फरीसियों नहीं समझ पाए।
2. कर वसूलने वालों : उन दिनों जब यीशु संसार में थे, कर वसूलने वालों को बड़ा चोर मन जाता था क्योंकि वे जरुरत से ज्यादा कर लोगों से लेते थे और खुद आधा पैसा खा लेते थे। लोगों के अनुसार वे बड़ा पापी थे।
3. मनुष्य का पुत्र : यीशु अपने आप को मनुष्य का पुत्र बुलाते थे।

समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. इस भाग में फरीसियों यीशु से 3 प्रश्न पूछतें हैं। वे सवाल क्या हैं और उनके उत्तर क्या हैं?
2. यीशु के अनुसार उनका इस संसार में आने का क्या मकसद था ? (2:17वे आयत को देखिये)
3. 2 : 17 में फरीसियों के सवाल से आप क्या समझते हैं - फरीसियों अपने आप के बारे में क्या सोचते थे ? यीशु ने जब फरीसियों को देखा तो उसे क्या दिखा ? (३:६ को  देखिये ) मैं अपने बारे में जो सोचता हूँ और यीशु को जो मुझमे दीखता है क्या वे दोनों बराबर होंगे ?
4. यीशु के आने के उद्देश्य को मन में रखते हुए क्या मुझे उसकी आवश्यकता है ? क्या मैं खुद को धर्मी समझता हूँ या एक पापी समझता हूँ ?

और गहरी सोच  के लिए:
1. उपवास करने का मकसद क्या है ? यीशु के चेले उपवास क्यों नहीं किये ?
2. 3:4 में वे फरीसियों यीशु का सवाल का जवाब नहीं देते हैं। उसका क्या कारण हो सकता है ?
3. फरीसियों के अनुसार धर्मी होने का अर्थ था कि कुछ भी हो नियमों का पालन करना है। क्या ऐसा सोच सही है?

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