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पड़ने का भाग: मरकुस 1:40 - 2:13
कठिन शब्दों :
1. कोढ़ रोगी : यहूदी परंपरा के अनुसार एक कोड रोगी को लोगों से अलग होकर रहना था। उसे अशुद्ध मन जाता था और किसी को भी उसे छूने कि इजाज़त नहीं थी। अगर उसका बीमारी ठीक हो गया तो उसे याजक के पास जाकर अपने आप को प्रस्तुत करना था और मूसा / मोशेह द्वारा निर्धारित शुद्धि सम्बन्धी भेंट चढ़ाने के बाद ही लोगों के मध्य में रह सकता था।
2. यहुदिओं का मानना था कि शारीरिक बीमारी का एक कारण उस व्यक्ति का पाप है।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. ४०वी आयत में उस कोढ़ रोगी के शब्दों से हमें उसके बारे में क्या पता चलता है ?
2. क्या मुझे यीशु के ताकत और सामर्थ पर उतना निश्चयता है जितना उस कोढ़ के रोगी को था ?
3. उस लकवे के रोगी को यीशु के पास लाने के लिए उसके साथियों को कितना कष्ट उठाना पड़ा? उनके इस कार्य से हमें उनके बारे में क्या पता चलता है ? और उनसे हम क्या सीख सकते हैं ?
4. यीशु को उन लोगों में क्या दिखा (५वी आयत को देखिये )
5. यीशु इस घटना से अपने बारे में क्या सिखाते हैं ? उन शास्त्रियों को वो क्या बोलते हैं ? यीशु को क्या करने का अधिकार है ? (१०वी आयत को देखिये )
और गहरी सोच के लिए:
1. यीशु उस कोढ़ रोगी को क्यों किसी को कुछ भी बोलने से मना किये ? उस के बात को फैलाने का यीशु कि सेवकाई पर क्या असर पड़ा ?
2. उन शास्त्रियों का रवैया यीशु के प्रति क्या था ? क्या वह सही था ?
3. शास्त्रियों के मन कि बातों को यीशु जान लिए। यह बात जानते हुए कि यीशु लोगों के मन कि बातों को जानता है, आपको कैसा लगता है ? क्या आप अपने मन कि सोच में कुछ बदलाव लाना चाहोगे ?
पड़ने का भाग: मरकुस 1:40 - 2:13
कठिन शब्दों :
1. कोढ़ रोगी : यहूदी परंपरा के अनुसार एक कोड रोगी को लोगों से अलग होकर रहना था। उसे अशुद्ध मन जाता था और किसी को भी उसे छूने कि इजाज़त नहीं थी। अगर उसका बीमारी ठीक हो गया तो उसे याजक के पास जाकर अपने आप को प्रस्तुत करना था और मूसा / मोशेह द्वारा निर्धारित शुद्धि सम्बन्धी भेंट चढ़ाने के बाद ही लोगों के मध्य में रह सकता था।
2. यहुदिओं का मानना था कि शारीरिक बीमारी का एक कारण उस व्यक्ति का पाप है।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. ४०वी आयत में उस कोढ़ रोगी के शब्दों से हमें उसके बारे में क्या पता चलता है ?
2. क्या मुझे यीशु के ताकत और सामर्थ पर उतना निश्चयता है जितना उस कोढ़ के रोगी को था ?
3. उस लकवे के रोगी को यीशु के पास लाने के लिए उसके साथियों को कितना कष्ट उठाना पड़ा? उनके इस कार्य से हमें उनके बारे में क्या पता चलता है ? और उनसे हम क्या सीख सकते हैं ?
4. यीशु को उन लोगों में क्या दिखा (५वी आयत को देखिये )
5. यीशु इस घटना से अपने बारे में क्या सिखाते हैं ? उन शास्त्रियों को वो क्या बोलते हैं ? यीशु को क्या करने का अधिकार है ? (१०वी आयत को देखिये )
और गहरी सोच के लिए:
1. यीशु उस कोढ़ रोगी को क्यों किसी को कुछ भी बोलने से मना किये ? उस के बात को फैलाने का यीशु कि सेवकाई पर क्या असर पड़ा ?
2. उन शास्त्रियों का रवैया यीशु के प्रति क्या था ? क्या वह सही था ?
3. शास्त्रियों के मन कि बातों को यीशु जान लिए। यह बात जानते हुए कि यीशु लोगों के मन कि बातों को जानता है, आपको कैसा लगता है ? क्या आप अपने मन कि सोच में कुछ बदलाव लाना चाहोगे ?
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