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पड़ने का भाग: मरकुस 1:16 - 39
कठिन शब्दों :
1. सब्त / शब्बत : यहुदिओं के लिए शनिवार का दिन एक पवित्र दिन था। परमेश्वर कि आराधना किया जाता है सब्त के दिन।
2. आराधनालय / सभागृह : यहुदिओं आराधनालय में प्रभु की आराधना करने को इखट्टा होते थे। वचन को पढ़ा जाता था और शास्त्रिओं आकर शिक्षा देते थे।
3. शास्त्री : लोगों को परमेश्वर का वचन सीखने वाले लोग। परन्तु यीशु के समय कई शास्त्रिओं जिस बात को सिखाते थे अपने खुद के जीवन में अक्सर लागु नहीं करते थे।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. यीशु का वचन शमौन और आंद्रेयास के लिए क्या था ?
2. शमौन, आंद्रेयास, यहुन्ना और याकूब को यीशु के पीछे होने से पहले क्या क्या त्यागना पड़ा? मुझे यीशु के पीछे हो लेने के लिए क्या छोड़ना पड़ेगा? क्या मैं उसे छोड़ने तैयार हूँ?
3. यीशु के बारे में दुष्टात्मा जनता था। दुष्टात्मा के अनुसार यीशु कौन है? क्या मैं जनता हूँ यीशु कौन है?
4. यीशु को किन किन बातों के ऊपर अधिकार है?
5. सुबह होते ही यीशु क्या करने को गए ? इससे हम क्या सिख सकते हैं?
और गहरी सोच के लिए:
1. पहला दिन के भाग में हमने यीशु के बारे में दो गवाही को देखा। आज हम एक दुष्टात्मा कि भी गवाही देखते हैं। इससे हमे यीशु के बारे में क्या पता चलता है?
2. 38वी आयत में यीशु प्रचार का सेवा का आरम्भ करते हैं। उसे करने से पहले यीशु क्या करते हैं ? क्या मैं भी कुछ नया कार्य शुरू करने से पहले वही करता हूँ?
3. शमौन के सास के जीवन में प्रभु ने कुछ अच्छा किया। ठीक होते ही शिमोन कि सास क्या करे लगी। जब मेरे जीवन में प्रभु कुछ अच्छा करता है, तब मैं क्या करता हूँ?
पड़ने का भाग: मरकुस 1:16 - 39
कठिन शब्दों :
1. सब्त / शब्बत : यहुदिओं के लिए शनिवार का दिन एक पवित्र दिन था। परमेश्वर कि आराधना किया जाता है सब्त के दिन।
2. आराधनालय / सभागृह : यहुदिओं आराधनालय में प्रभु की आराधना करने को इखट्टा होते थे। वचन को पढ़ा जाता था और शास्त्रिओं आकर शिक्षा देते थे।
3. शास्त्री : लोगों को परमेश्वर का वचन सीखने वाले लोग। परन्तु यीशु के समय कई शास्त्रिओं जिस बात को सिखाते थे अपने खुद के जीवन में अक्सर लागु नहीं करते थे।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. यीशु का वचन शमौन और आंद्रेयास के लिए क्या था ?
2. शमौन, आंद्रेयास, यहुन्ना और याकूब को यीशु के पीछे होने से पहले क्या क्या त्यागना पड़ा? मुझे यीशु के पीछे हो लेने के लिए क्या छोड़ना पड़ेगा? क्या मैं उसे छोड़ने तैयार हूँ?
3. यीशु के बारे में दुष्टात्मा जनता था। दुष्टात्मा के अनुसार यीशु कौन है? क्या मैं जनता हूँ यीशु कौन है?
4. यीशु को किन किन बातों के ऊपर अधिकार है?
5. सुबह होते ही यीशु क्या करने को गए ? इससे हम क्या सिख सकते हैं?
और गहरी सोच के लिए:
1. पहला दिन के भाग में हमने यीशु के बारे में दो गवाही को देखा। आज हम एक दुष्टात्मा कि भी गवाही देखते हैं। इससे हमे यीशु के बारे में क्या पता चलता है?
2. 38वी आयत में यीशु प्रचार का सेवा का आरम्भ करते हैं। उसे करने से पहले यीशु क्या करते हैं ? क्या मैं भी कुछ नया कार्य शुरू करने से पहले वही करता हूँ?
3. शमौन के सास के जीवन में प्रभु ने कुछ अच्छा किया। ठीक होते ही शिमोन कि सास क्या करे लगी। जब मेरे जीवन में प्रभु कुछ अच्छा करता है, तब मैं क्या करता हूँ?
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