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पड़ने का भाग: मरकुस 8 : 1 - 13
कठिन शब्दों :
1. आश्चर्य चिन्ह : यहूदी लोग का विश्वास था कि जब मसीह आएगा तो वह जितना बड़ा आश्चर्यकर्म मूसा ने किया उससे भी बड़े बड़े काम करेगा। मूसा ने पुरे इस्राएली लोगों को 40 सालों के लिए खिलाया, हलाकि उसने नहीं परन्तु परमेश्वर ने मूसा के द्वारा। फरीसि लोग यीशु से चिन्ह इसलिए मांग रहे थे या दूसरे शब्दों में वे यीशु को अपने आप को मसीह साबित करने को कह रहे थे जो एक बहाना था क्योंकि वे विश्वास करने को तैयार ही नहीं थे। उनके अनुसार 400 लोगों को एक बार खिलाना छोटी बात थी अगर मूसा के कामों से तुलना किया जाये तो।
2. चार हज़ार पुरुष : इसरायली परंपरा के अनुसार महिलाओं और बच्चों को नहीं गिना जाता था तो कुल संख्या और बहुत ज्यादा हुआ होगा।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. यीशु को भीड़ को देखकर क्या भावना महसूस हुआ ?
2. जब चेलों ने कहा कि इतनों के लिए खाना खिलाना मुश्किल होगा तब यीशु ने क्या सवाल पूछा ? अगर मुझे लगता है कि इतना बड़ा चीज़ करना मुश्किल है मुझे पूछना है मेरे पास यही क्या है। जब चेले जो उनके पास था उसको देने को तैयार हुए तब यीशु ने उसे आशीषित करके लोगों को खिलाया। क्या मैं मेरा पास जितना है भले कम क्यों न हो, क्या मैं उसे देने को तैयार हूँ लोगों के लिए ?
3. क्या मुझे यीशु के सामर्थ्य पे कभी शक करना है ?
और गहरी सोच के लिए:
1.यीशु सिर्फ लोगों के आत्मिक जीवन पर ही चिंतित नहीं था परन्तु उनकी शारीरिक जरूरतों को भी संभालता था। क्या मैं लोगों के प्रति ऐसी मनसा रखता हूँ ?
पड़ने का भाग: मरकुस 8 : 1 - 13
कठिन शब्दों :
1. आश्चर्य चिन्ह : यहूदी लोग का विश्वास था कि जब मसीह आएगा तो वह जितना बड़ा आश्चर्यकर्म मूसा ने किया उससे भी बड़े बड़े काम करेगा। मूसा ने पुरे इस्राएली लोगों को 40 सालों के लिए खिलाया, हलाकि उसने नहीं परन्तु परमेश्वर ने मूसा के द्वारा। फरीसि लोग यीशु से चिन्ह इसलिए मांग रहे थे या दूसरे शब्दों में वे यीशु को अपने आप को मसीह साबित करने को कह रहे थे जो एक बहाना था क्योंकि वे विश्वास करने को तैयार ही नहीं थे। उनके अनुसार 400 लोगों को एक बार खिलाना छोटी बात थी अगर मूसा के कामों से तुलना किया जाये तो।
2. चार हज़ार पुरुष : इसरायली परंपरा के अनुसार महिलाओं और बच्चों को नहीं गिना जाता था तो कुल संख्या और बहुत ज्यादा हुआ होगा।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. यीशु को भीड़ को देखकर क्या भावना महसूस हुआ ?
2. जब चेलों ने कहा कि इतनों के लिए खाना खिलाना मुश्किल होगा तब यीशु ने क्या सवाल पूछा ? अगर मुझे लगता है कि इतना बड़ा चीज़ करना मुश्किल है मुझे पूछना है मेरे पास यही क्या है। जब चेले जो उनके पास था उसको देने को तैयार हुए तब यीशु ने उसे आशीषित करके लोगों को खिलाया। क्या मैं मेरा पास जितना है भले कम क्यों न हो, क्या मैं उसे देने को तैयार हूँ लोगों के लिए ?
3. क्या मुझे यीशु के सामर्थ्य पे कभी शक करना है ?
और गहरी सोच के लिए:
1.यीशु सिर्फ लोगों के आत्मिक जीवन पर ही चिंतित नहीं था परन्तु उनकी शारीरिक जरूरतों को भी संभालता था। क्या मैं लोगों के प्रति ऐसी मनसा रखता हूँ ?
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