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पड़ने का भाग: मरकुस 9 : 30 - 50
कठिन शब्दों :
1. नमक : इस्राएल में जो नमक का उपयोग होता था वो मृत सागर से आता था और उसमे कई अशुद्धताएं थीं। इसकी वजह से कई बार उसकी नामकीनपन चली जाती थी।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. यीशु चेलों को अकेला सिखाते हैं। क्या मुझे यह जानकर प्रोत्साहन मिलती है कि यीशु जितना कि भीड़ क्यों न हो अपने चेलों के लिए उनके पास अलग सा समय है ?
2. रास्ते में चेलों के सोच विचार से उनके बारे में क्या पता चलता है ? क्या वही स्वार्थी स्वभाव के कारण वे ३८वे वचन में उस व्यक्ति को रोखने का प्रयास किये ?
3. यीशु के अनुसार हम में कैसा स्वभाव होना चाहिए ? क्या मैं औरों का सेवक बनने को तैयार हूँ ?
4. पाप के विषय में यीशु कितने गंभीरता के साथ शिक्षा दिए ? क्या मैं पाप को उतना ही गंभीर लेता हूँ ? क्या पाप को हटाने के लिए मैं अपने जीवन से कुछ भी हटाने को तैयार हूँ ? हाथ पैर शायद काटना नहीं पड़े पर अगर मैं अपने फोन के कारण पाप कर रहा हूँ क्या मैं अपना फोन के बिना रह सकता हूँ ?
5. मुझे अपने जीवन से पाप हटाने के लिए क्या हटाना होगा ?
और गहरी सोच के लिए:
1. परमेश्वर कि सेवा में हर किसी का योगदान जरुरी है। भले वो आदमी छोटा से छोटा काम क्यों न कर रहा हो। यीशु कहते हैं अगर हम प्रभु के लोगों को पानी भी पिलाये वो बड़ी बात है। परमेश्वर के सेवा में मेरा क्या योगदान है ?
पड़ने का भाग: मरकुस 9 : 30 - 50
कठिन शब्दों :
1. नमक : इस्राएल में जो नमक का उपयोग होता था वो मृत सागर से आता था और उसमे कई अशुद्धताएं थीं। इसकी वजह से कई बार उसकी नामकीनपन चली जाती थी।
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. यीशु चेलों को अकेला सिखाते हैं। क्या मुझे यह जानकर प्रोत्साहन मिलती है कि यीशु जितना कि भीड़ क्यों न हो अपने चेलों के लिए उनके पास अलग सा समय है ?
2. रास्ते में चेलों के सोच विचार से उनके बारे में क्या पता चलता है ? क्या वही स्वार्थी स्वभाव के कारण वे ३८वे वचन में उस व्यक्ति को रोखने का प्रयास किये ?
3. यीशु के अनुसार हम में कैसा स्वभाव होना चाहिए ? क्या मैं औरों का सेवक बनने को तैयार हूँ ?
4. पाप के विषय में यीशु कितने गंभीरता के साथ शिक्षा दिए ? क्या मैं पाप को उतना ही गंभीर लेता हूँ ? क्या पाप को हटाने के लिए मैं अपने जीवन से कुछ भी हटाने को तैयार हूँ ? हाथ पैर शायद काटना नहीं पड़े पर अगर मैं अपने फोन के कारण पाप कर रहा हूँ क्या मैं अपना फोन के बिना रह सकता हूँ ?
5. मुझे अपने जीवन से पाप हटाने के लिए क्या हटाना होगा ?
और गहरी सोच के लिए:
1. परमेश्वर कि सेवा में हर किसी का योगदान जरुरी है। भले वो आदमी छोटा से छोटा काम क्यों न कर रहा हो। यीशु कहते हैं अगर हम प्रभु के लोगों को पानी भी पिलाये वो बड़ी बात है। परमेश्वर के सेवा में मेरा क्या योगदान है ?
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