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पड़ने का भाग: मरकुस 11 : 20 - 33
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. प्रार्थना करने से पहले मुझे क्या करना चाहिए ?
2. याजकों और धर्मशास्त्रियों किन से ज्यादा डरते थे - परमेश्वर से या लोगों से ? या दूसरे शब्दों में वे किनको खुश रखने का प्रयास ज्यादा करते थे ? क्या मैं भी उनके समान हूँ इस विषय में ?
और गहरी सोच के लिए:
1. याजकों और धर्मशास्त्रियों ने यीशु का अधिकार को नहीं माना। क्या मैं यीशु के अधिकार को मानता हूँ मेरे जीवन को साफ करने के लिए ? क्या मैं यीशु को पूरा इजाज़त दिया हूँ की वह मेरे जीवन को कैसे भी तरह से सुधरे ?
पड़ने का भाग: मरकुस 11 : 20 - 33
समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. प्रार्थना करने से पहले मुझे क्या करना चाहिए ?
2. याजकों और धर्मशास्त्रियों किन से ज्यादा डरते थे - परमेश्वर से या लोगों से ? या दूसरे शब्दों में वे किनको खुश रखने का प्रयास ज्यादा करते थे ? क्या मैं भी उनके समान हूँ इस विषय में ?
और गहरी सोच के लिए:
1. याजकों और धर्मशास्त्रियों ने यीशु का अधिकार को नहीं माना। क्या मैं यीशु के अधिकार को मानता हूँ मेरे जीवन को साफ करने के लिए ? क्या मैं यीशु को पूरा इजाज़त दिया हूँ की वह मेरे जीवन को कैसे भी तरह से सुधरे ?
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