सोमवार, 6 अप्रैल 2020

मरकुस - दिन 10

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पड़ने का भागमरकुस 6: 1 - 31 

समझने और विचार करने के लिए प्रश्न:
1. शिष्यों के प्रचार में और यूहन्ना के प्रचार में एक समानता है। वह समानता को ढूंढिए।
2. यीशु ने जब शिष्यों को दो दो में भेजा तो उन्हें कुछ निर्देश दिया कि खाना नहीं लें और न कोई धन। अगर पैसा होता तो अपने पैसे पर भरोसा करते मगर अब उनका एकमात्र भरोसा कौन है ? क्या मुझे यीशु पर उतना विश्वास है कि मैं यीशु के बातों को इतना मन सकूँ ?
3. हेरोदेस यूहन्ना से क्यों डरता था ? यूहन्ना के बारे में उसका क्या विचार था ? दुश्मन तो दूर कि बात है, क्या कम से कम मेरा दोस्त मेरे बारे में वैसा बोलेगा ?
4. यूहन्ना के जीवन में सही बात को बोलने का क्या परिणाम था ? यूहन्ना बहुत दिन जेल में होने के बावजूद सच बोलना बंद नहीं किया। क्या मुझे सही बात बोलने का हिम्मत है ?
5. जब शिष्य वापस आये तो यीशु ने उनको क्या कहा ? इससे यीशु के बारे में क्या पता चलता है ?

और गहरी सोच  के लिए:
1. यीशु के नगर के लोगों ने यीशु को बहुत देखा होगा। शायद इसलिए वे उस पर ज्यादा विश्वास नहीं किये। जो आश्चर्य दूसरे जगहों में था यीशु के प्रति वो नहीं था यहाँ। क्या मैं यीशु के बारे में इतना अधिक सुना हूँ कि मेरा उसके प्रति विश्वास कम हो गया ?
2. हेरोदेस ने कई बार वचन को सुना मगर उसने पश्चाताप नहीं किया। यूहन्ना और शिष्यों दोनों का सन्देश वही था। क्या मैं भी हेरोदेस के समान अक्सर वचन को सुनता हूँ मगर अपने जीवन में उसे लागु नहीं करता हूँ ?

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